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2. मनोविज्ञान का इतिहास व भारतीय मनोविज्ञान |History of Psychology and Indian Psychology

Learning By Mj

मनोविज्ञान का इतिहास (History of Psychology)

मनोविज्ञान का इतिहास को भारतीय मनोविज्ञान


*मनोविज्ञान- मनोविज्ञान की उत्पत्ति यूनान में दर्शन शास्त्र विषय से अरस्तु के समय में 384 ई.पू. से 322 ई.पू. ग्रीक की भाषा के दो शब्द Psche + Logos से मिलकर हुई थी।

*मनोविज्ञान का जनक- मनोविज्ञान को दर्शनशास्त्र से अलग करने का विचार सबसे पहले अरस्तू ने दिया था इसलिए मनोविज्ञान का जनक अरस्तु को कहा जाता है।

*मनोविज्ञान शब्द- मनोविज्ञान शब्द का सबसे पहले प्रयोग अथवा मनोविज्ञान का नामकरण अथवा मनोविज्ञान की प्रथम पुस्तक साइकोलॉजिया (Pschologia) या मनोवैज्ञानिका की रचना सोलवीं सदी में सन 1590 में इटली के रूडोल्फ गोयकल ने किया था।

*मनोविज्ञान का वैज्ञानिक रूप- मनोविज्ञान का वैज्ञानिकीरण 18 वीं सदी में स्विट्जरलैंड में पेस्टोलॉजी ने किया।
      इन्होंने अपने 3½ वर्ष के पुत्र के बाल विकास का क्रमबद्ध अध्ययन करके Baby Graphy (बालकथा) नामक पत्रिका में बाल विकास का वैज्ञानिक विवरण दिया।
   अतः इन्हें बाल विकास अथवा बाल मनोविज्ञान की वैज्ञानिक विचारधारा का जनक भी करते हैं।

* मनोविज्ञान का आधुनिकीकरण- मनोविज्ञान का आधुनिकीकरण सन् 1900 में वियाना (ऑस्ट्रिया) में सिगमंड फ्रायड ने किया।
     इन्होंने मन/मस्तिष्क के आधार पर चेतना का विश्लेषण करके सन् 1900 में मनोविश्लेषणवाद का सिद्धांत दिया। अतः सन् 1900 के पूर्व मनोविज्ञान को प्राचीन मनोविज्ञान और बाद में मनोविज्ञान को आधुनिक मनोविज्ञान कहा गया जिसका जनक सिग्मड फ्रायड को माना जाता है।

*लुम्सडिन व पिल्सबरी- सिग्मंड फ्रायड को लुम्सडिन व पिल्सबरी के द्वारा इन्हें विश्व का प्रथम मनोवैज्ञानिक कहा है।

*काॅलसनिक के अनुसार- विश्व के प्रथम मनोवैज्ञानिक प्लेटो है अर्थात्‌ मनोविज्ञान की शुरुआत पलेटों से हुई थी।

*प्रयोगिक मनोविज्ञान- सन् 1879 में जर्मनी के लिपजिंग  नगर में स्थित कार्ल मार्क्स विश्वविद्यालय में विलियम वुण्ट द्वारा मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला की स्थापना की थी।
      वर्तमान में मनोविज्ञान प्रयोग पर आधारित है अतः इन्हें मनोविज्ञान का उपजनक भी करते हैं।

*आदत एवं आत्म सम्प्रत्यय-  इन्होंने अमेरिका में मनोविज्ञान की नींव रखी। सन् 1890 ई. में मनोविज्ञान की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक प्रिंसिपल ऑफ साइकोलॉजी (Principal of Psychology) में आदत एवं आत्म सम्प्रत्यय का विचार सबसे पहले विलियम जेम्स के द्वारा दिया गया अतः अमेरिकी मनोविज्ञान का जनक विलियम जेम्स को कहा जाता है।

*वास्तविक मनोविज्ञान- फ्रेंचनर ने विलियम वुण्ट के सहयोग से 1850 ई. मनोविज्ञान को दर्शनशास्त्र से अलग करके एक स्वतंत्र विषय के रूप में मान्यता दिलाई तथा मनोविज्ञान को वास्तविक मनोविज्ञान नाम दिया। विलियम वुण्ट के शिष्य फ्रेंचनर थे।

मनोविज्ञान की शाखाएं /क्षेत्र (23)
क्र.सं. शाखाएं/क्षेत्र प्रवर्तक/ जनकविशेष बिन्दु
1.सामान्य मनोविज्ञान  -
2.असामान्य मनोविज्ञान--
3.विकृत मनोविज्ञान--
4.प्रौढ़ मनोविज्ञान-सबसे छोटा क्षेत्र- 0.002%
5.बाल मनोविज्ञानप्लेटोक्षेत्र- 0.7%
6.किशोर मनोविज्ञानस्टेनले हॉल-
7.शिक्षा मनोविज्ञान थार्नडाइक क्षेत्र- 18%
8.चिकित्सा मनोविज्ञानहिप्पोक्रेट्स-
9.अपराध मनोविज्ञानसीजर लिम्ब्रोसोबाल सुधार गृह- न्यूयार्क 1883
10.विकासात्मक मनोविज्ञानजीन पियाजे-
11.सामाजिक मनोविज्ञानअल्बर्ट बन्डूरा-
12.नैदानिक मनोविज्ञानटाइड मैनमनोविज्ञान की प्राचीनतम शाखा सन् 1737 में जर्मनी में उत्पन्न हुई। मनोविज्ञान का सबसे बड़ा क्षेत्र 38% शाखा का है।
13.विभेदक मनोविज्ञान फ्रांसिस गाल्टन -
14.गतिशील मनोविज्ञानकुर्ट लेविन-
15.आनुवांशिक मनोविज्ञानग्रेगर जाॅन मेंडल-
16.शरीर क्रिया मनोविज्ञानविलियम मैक्डूगल -
17.प्रायोगिक मनोविज्ञानविलियम वुण्टमनोविज्ञान की उत्पत्ति के बाद पहली शाखा 1879 में जर्मनी में ।
18.पशु मनोविज्ञानजे. बी. वाटसन-
19.तुलनात्मक मनोविज्ञान चार्ल्स डार्विन -
20.सैन्य मनोविज्ञान--
21.व्यवसायिक प्रबंधन मनोविज्ञान--
22.औद्योगिक मनोविज्ञान--
23.परा मनोविज्ञान-यह मनोविज्ञान की सबसे नवीन शाखा है जिसे मनोविज्ञान की शाखा के रूप में सन 2008 में अमेरिका के कारनेगी इस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के द्वारा शामिल किया गया।


भारत में मनोविज्ञान का इतिहास (History of Psychology in India) 

* भारत में मनोविज्ञान का आगमन सन् 1905 ई. में कोलकाता विश्वविद्यालय में हुआ। डॉ आशुतोष मुखर्जी को मनोविज्ञान के प्रवक्ता पद पर नियुक्त किया गया।
  अतः इन्हें भारत का प्रथम मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक कहा गया।

*भारतीय मनोवैज्ञानिक प्रयोगशाला - भारत में मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला की स्थापना सन् 1916 ई. कोलकाता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एस.एन.एन.सेन गुप्ता एवं प्रोफेसर उमा चधरी के माध्यम से की गई।

* भारत में शिक्षा मनोविज्ञान- प्रोफ़ेसर स्वामी नाथ नरेंद्र देव सेन गुप्ता के माध्यम से भारत में मनोविज्ञान के पाठ्यक्रम का संचालन सन् 1916 ई. से कोलकाता विश्वविद्यालय में शिक्षा मनोविज्ञान के रूप में हुआ। 
      अतः इन्हें भारतीय मनोविज्ञान का एवं भारतीय शिक्षा मनोविज्ञान का जनक कहा गया इन्हें भारत का प्रथम शैक्षिक मनोवैज्ञानिक भी कहते हैं।

भारतीय मनोविज्ञान की परिभाषाएं (Definition of Indian Psychology) 


*शिव संकल्प सूत्र: - "मेरा चित जागृत अवस्था में दूर-दूर भागता है और सुप्त अवस्था में भी स्वप्न आदि के रूप में उसी प्रकार आता है।" वह दूर दूर जाने वाला ज्योतिस्वरुप दिव्य शक्ति से युक्त मेरा मन शुभ संकल्प वाला हो।

*भगवद् गीता :- "इन्द्रियों से सूक्ष्म प्राण है,  प्राण से सूक्ष्म मन है, मन से सूक्ष्म बुद्धि है और बुद्धि से भी सूक्ष्म वह आत्मा है।"

*पतंजलि मुनि कृत योगशास्त्र: - "चित्त की वृत्तियों का निरोध योग है।"
 
* स्वामी शंकराचार्य ने वेदांत दर्शन:- "मन को विश्व की कामना करने वाला कहा है।"

* गुरु वशिष्ट के ग्रंथ योग वशिष्ठ:- "हे राम! इस विश्व संसार में चंचलता से शून्य मन तो कहीं भी नहीं दिखाई पड़ता।"

*ऋग्वेद: - "यदि तू समर्थ होकर मन को स्थिर करें तो तू स्वयं ही उन अनेक प्रकार के विघ्नों पर विजय प्राप्त कर सकता है।"

*तैत्तिरीय उपनिषद के अनुसार: - "भृगु ने अपने पिता वरूण से कहा भगवन्! मुझे ब्रह्म का ज्ञान कराओ - 'वरुण ने उत्तर दिया जिससे ये सब प्राणी उत्पन्न होते हैं, उत्पन्न होने  पर जीवित रहते हैं और अंत में उस में विलीन हो जाते हैं वह ब्रह्म है यह ब्रह्म तप से जाना जाता है।"

* भारतीय मनोविज्ञान का आधुनिक काल 1915 में प्रारंभ हुआ।

* प्रोफेसर बॉस ने भारतीय मनोविश्लेषण संघ इंडियन साइकोएनालिटिक संघ सन् 1922 में स्थापना की।


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