शाम का समय आकाश में तारे निकल आये थे। उस समय मैं थोड़ी दूर एक चाय की टपरी पर चला गया और चाय की चूसकी ले रहा था। मेरे पास ही दो- तीन आदमी भी चाय पी रहे थे। तभी वहां से एक बहुत सुंदर महिला का गुजरना हुआ। उस महिला का घटीला शरीर, लंबे बाल, चौड़ी व फुली हुई छाती बहुत ही आकर्षित कर रही थी।
मेरे पास बैठे हुए दो-तीन आदमी उस महिला की तरफ देखकर उसके बारे में गंदी और भदी बातें करने लग रहे थे। मैंने उनकी तरफ देखा और अपने मन में सोचा कि किसी गरीब और लाचार के बारे में, इस प्रकार बोलना और व्यवहार करना शोभा नहीं देता है। वह महिला वहां से गुजर चुकी थी और पास वाली दवाई वाले की दुकान पर चली गई।
उसे महिला ने मेडिकल वाले से एक बुखार मिटाने की दवाई मांगी। उस दवाई की कीमत पचास रूपये लिखा था। लेकिन वह महिला इतने रुपए साथ नहीं लेकर आई थी कि पचास रूपये की दवा का पूरा भुगतान किया जा सके। उसके पास केवल चालीस रूपये ही थे। और वह मेडिकल वाले से कह रही थी कि 'भाई मैं कल आपके दस रूपये चुका दूंगी।' तभी मेडिकल वाले ने मना करते हुए कहा, 'जब तुम्हारे पास पैसे ही नहीं तो यहां क्या लेने आई चल भग यहां से, इस दवा को यहीं रख कर जा।' मैं इस दृश्य को देख रहा था। क्योंकि वह मेडिकल दुकान उसे चाय की टपरी के पास ही थी। मैं उस मेडिकल स्टोर के पास आकर बोला, हेलो भाई साहब! आपको इस प्रकार, इस महिला का अनादर नहीं करना चाहिए था किसी गरीब की स्थिति को समझना चाहिए था। आपको किसी को इस तरह अपमानित करने का अधिकार नहीं ।
आपको इस दवा को देने के लिए, इतना अपमान करना उचित नहीं है। इस महिला के पास चालीस रूपए हैं और मैं दस रूपए और देता हूं। यह लीजिए आपका पूरा भुगतान हो गया है, अब दवा दीजिए। आप लोग किसी गरीब अनाथ कमजोर लोगों की स्थिति का फायदा उठाना अच्छी तरह जानते हो आपको उनकी स्थिति को समझना जरूरी है। किसी का बैठा बीमार है और आपको केवल रूपये की पड़ी है। वह महिला दवा लेकर मेडिकल स्टोर से चली जाती है।
मेडिकल वाला आदमी अपनी गलती पर बहुत शर्मिंदा है और मुझसे कहता है भाई साहब! मैं एक काम करने वाला नौकरी हूँ, मैं भी तनख्वाह पर काम करता हूँ, मेरा मालिक जब दुकान पर आता है तो वह मुझसे पूरा हिसाब पूछता है, मैं उसको क्या जवाब देता? आप ही बताइए। मुझे किसी गरीब और कमजोर व्यक्तियों का अहित करने में मजा नहीं आता है। मैं भी मजबूर हूँ ,साहब! चलो ठीक है, आगे से ध्यान रखना। किसी भी आर्थिक व्यक्ति का अहित करने से पहले एक बार जरूर सोचना चाहिए कि इस परिस्थिति में यदि हम होते तो हमारी भी ऐसी हालत होती ।
जो व्यक्ति उस महिला को देखकर अनर्गल बाते कर रहे थे उनके मुँह पर ये एक तमाचा है। किसी गरीब असहाय व्यक्ति या महिला की मदद नहीं कर सकता है तो उसके बारे में गलत टिप्पणी करना उचित नहीं है। ऐसा आपके स्वयं के परिवार के साथ भी घटित हो सकता है। मुझे पूरा विश्वास है कि आपको इस कहानी से कोई सीख अवश्य मिली होगी। जीवन लंबा है इसमे कोई क्षण ऐसे भी आता है जब हम किसी समस्या में उलझ जाते हैं। उस समय जो हमारी सहायतार्थ आता है। उसे हम जीवन भर नहीं भूलते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते है जो किसी कि सहायता पाकर भी अपने आप को नवाब समझ के बैठे होते है। मुझे उन पर बहुत क्रोध आता है। जो कृतघ्न होते है।


1 Comments
Very Good
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